जानिए क्यों है प्राइवेट नौकरिया – सरकारी से बेहतर आप्शन

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कई निम्न वर्ग और मध्यम वर्गीय परिवार इस दुविधा में रहते हैं कि उनके बच्चे प्राइवेट सेक्टर जॉब में जाए या फिर सरकारी नौकरी में ? पिछले कुछ दशकों में प्राइवेट सेक्टर जॉब अधिक प्रचलन में है, जबकि पहले नौकरी ढूंढने वालों के लिए सरकारी नौकरी पाना एक बड़े इनाम की तरह था। लोगों के अनुसार गवर्नमेंट जॉब (Government Job) में प्राइवेट सेक्टर जॉब की अपेक्षा अधिक सुविधाएं मिलती है।

इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे बिंदुओं पर प्रभाव डालेंगे जिससे आप यह सुनिश्चित कर पाएंगे की प्राइवेट सेक्टर जॉब और गवर्नमेंट जॉब में अधिक भिन्नता नहीं है। कहीं न कहीं दोनों ही तरह की जॉब व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक व व्यक्तिगत प्रगति में सहायक है।

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#1) जॉब वर्किंग लोकेशन (Job Working Location)

जब आप सरकारी नौकरी के लिए अप्लाई करते हैं  तो  आपके पास मनचाही जगह पर नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं होता, जिस स्थान पर भी आपको नियुक्ति दी जाती ह, आपको वहीं पर  रहकर अपना कार्य करना होता है और यहां तक कि गवर्नमेंट जॉब की सिलेक्शन प्रक्रिया भी बहुत कठिन होती है जिसे  लाखों लोगों में से  कुछ ही लोग  पूर्ण कर पाते हैं। इस प्रकार वे व्यक्ति जो लगातार कंपटीशन की तैयारी करते रहते हैं  अपने उम्र के कई साल तो यूं ही गवा देते हैं। अगर व्यक्ति अपने इन्ही सालो में प्राइवेट नौकरी करता तो वह अनुभव और पैसे दोनों ही कमा लेता |

जबकि प्राइवेट सेक्टर जॉब में ऐसा नहीं होता है। आपको अपने अनुसार नियुक्ति स्थान चुनने का मौका मिलता है और इनकी नियुक्ति प्रक्रियाएं भी तेज होती हैं। सरकारी विभागों की तरह इनकी एक नियुक्ति 1-2 साल का समय नहीं लेती।

#2) स्थानांतरण या ट्रांसफर (Job Transfer) –

सरकारी विभागों में कार्य करने वाले व्यक्तियों को इस बात का हमेशा भय बना रहता है कि कहीं उनका ट्रांसफर किसी और जगह  न हो जाए क्योंकि ऐसी स्थिति में आपके पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं रहता है सिवाय इसके कि आप उसी स्थान पर जाकर अपनी नौकरी करे।

किंतु प्राइवेट सेक्टर जॉब में व्यक्ति को इतनी जल्दी स्थानांतरित नहीं किया जाता। जिस भी कंपनी के लिए वह कार्य कर रहा है वह उसके लिए  बिना किसी रूकावट  एक लंबे अरसे तक काम कर सकता है।

#3)  वर्क एनवायरनमेंट (Job Work Environment)-
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जब आप किसी भी सरकारी  ऑफिस  जाते हैं  तो आपने यह अवश्य देखा होगा कि वहां के कर्मचारियों में सुस्ती व आलास होता है। उनके कार्य करने का ढंग  बेहद ढीला होता है। एक प्रकार से हम यह कह सकते हैं कि सरकारी विभागों में  लेजी वर्क देखा जाता है।

जबकि प्राइवेट ऑफिस में ऐसा नहीं होता वहां एक अच्छा वर्क एनवायरनमेंट देखने को मिलता है । सभी व्यक्ति चाहे जूनियर हो या सीनियर एक टीम की तरह अपने अपने कार्य पर डटे रहते हैं। उनमें  आलसपन बिल्कुल भी नहीं होता  और सभी अपने कार्य के प्रति सजग रहते हैं।

#4) एज लिमिट (Job Age Limit)-

आप लोग जानते होगे की सरकारी जॉब में अप्लाई करने की मैक्स लिमिट 30 – 35 साल तक होती है | सरकारी जॉब में व्यक्ति एक निश्चित आयु के बाद अपनी नौकरी से रिटायरमेंट प्राप्त करता है । रिटायरमेंट की उम्र अधिकतर  सरकारी नौकरी में  60 वर्ष मानी गई है। 60 वर्ष के उपरांत वह व्यक्ति  अपने पद पर कार्य नहीं कर सकता।

जबकि प्राइवेट ऑफिस में ऐसा नहीं है यदि व्यक्ति ने 60 वर्ष की उम्र पूरी कर भी ली है तो भी यदि उस व्यक्ति के अंदर काबिलियत और  क्षमता है तो वह  आगे भी अपने कार्य के द्वारा कंपनी को पूरा सहयोग दे सकता है।

#5) विकास  एवं प्रगति (Growth & Development)-

विकास और प्रगति को देखते हुए सरकारी विभाग कहीं पीछे नजर आते हैं। उनमें विकास की दर बहुत धीमी होती है यही कारण है कि सरकारी जॉब में व्यक्तियों को कम वेतन दी जाती है|
चूँकि प्राइवेट ऑफिस में विकास की दर बहुत तेज होती है। इसके साथ ही व्यक्ति अपने कार्य के द्वारा भी अपना और कंपनी का विकास कर सकता है। 
प्रगति के क्षेत्र में देखा जाये तो अब ऐसे कोई सेक्टर नहीं बचा हुआ है जहा प्राइवेट कंपनियों ने कदम ना रखा हो | यही नहीं सरकारी कंपनी खुद हीअब अपने tendor प्राइवेट कंपनी को देती है सरकारी काम करने के लिए | Eg. लखनऊ मेट्रो या दिल्ली मेट्रो के कम को ही ले |

#6) जॉब सिक्यूरिटी (Job Security)-

सरकारी नौकरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उसमें जॉब सिक्योरिटी मिलती है किंतु यदि किसी कारण वश आपकी नौकरी छूट जाती है तो उस स्थिति में आपके पास दूसरा कोई चारा नही रहता | कई शर्तों के तहत यह सिक्योरिटी छीन भी ली जाती है।किसी अन्य कार्य , अपराध जनक कार्य करने या उसमें सम्मिलित होने पर सरकारी जॉब में कोई सिक्योरिटी नहीं रह जाती।आप एक ही क्षेत्र में बंधे रहते हैं|

प्राइवेट सेक्टर जॉब में सिक्योरिटी की बात की जाए तो यदि आप ईमानदारी और निष्ठा से कंपनी को अपना बेहतर कार्य प्रदर्शन दे रहे हैं तो वह भी जॉब सुरक्षा के अंतर्गत ही आता है। अपने काम के प्रति वफादारी आपको प्राइवेट सेक्टर जॉब में भी जॉब सिक्योरिटी दिलाती है।इसके अतिरिक्त आपके पास विभिन्न क्षेत्र और विभागों में जाने क विकल्प होते है

#7) कार्य की अवधि (Job Working Hours – 8 hour) –

एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि आप सरकारी नौकरी में हो या प्राइवेट, कितने घंटे कार्य करते हैं। सरकारी नौकरी में व्यक्ति 7 से 8 घंटे  का समय देता है। यह बात अलग है कि वह कार्य करता है या नहीं। आवश्यकता पड़ने पर सरकार अपने कर्मचारियो से ओवरटाइम भी करवाती है और इसके लिए वह कर्मचारियों को कुछ मानदेय भी देती  है।

लगभग यही कार्यकाल प्राइवेट जॉब में भी होता है रही बात ओवरटाइम की तो कुछ प्रमुख कंपनियां प्राइवेट नौकरी में भी ओवरटाइम करने का कुछ निश्चित उपहार अवश्य देती है।

#8) प्रमोशन (Promotion) –

सभी व्यक्ति कार्य के दौरान प्रमोशन की इच्छा रखते हैं। सरकारी नौकरी की बात की जाए तो कुछ निश्चित समय अवधि के बाद ही व्यक्ति को प्रमोशन की प्राप्ति होती है चाहे व्यक्ति  कितना भी अच्छा कार्य क्यों न कर रहा हो।

जबकि प्राइवेट सेक्टर में ऐसा नहीं होता अपने कार्य और हुनर के अनुसार समय को न देखते हुए प्राइवेट कंपनियां प्रमोशन प्रदान करती हैं।

#9) वेतन या भुगतान (Salary Wages )

सरकारी नौकरियां कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम वेतन का भुगतान करती हैं। सातवें वेतन आयोग के लागू होने से सरकारी नौकरी की वेतन में कुछ बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ कई सरकारी नौकरियां जैसे बैंक, कुछ अन्य खर्चों के लिए भी भुगतान करता है।जैसे – रेजिडेंस, ट्रांसपोर्टेशन  इत्यादि।
प्राइवेट कंपनियां अपने वर्कर्स को अच्छा वेतन प्रदान करती हैं कई फेमस कंपनियां बैंकों की तरह अन्य खर्चों का भी भुगतान करती हैं।

#10) लाभ व सुविधाएं (Job Benefits)-

सरकारी विभाग अपने कर्मचारियों को रिटायरमेंट लाभ, पेंशन प्लान और फंड जैसी सुविधाएं प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त मेडिकल, हाउसिंग, लोन के लिए भी आर्थिक मदद प्रदान करते हैं।

उसी प्रकार कुछ बड़ी प्राइवेट कंपनियां भी इस प्रकार के लाभ देती है क्योंकि प्राइवेट कंपनियां अपने वर्कर्स को अधिक वेतन प्रदान करती है तो वर्कर्स को इसका कुछ हिस्सा अपने पेंशन और रिटायरमेंट के लिए उपयोग करना चाहिए। यहां पर फर्क सिर्फ इतना ही है कि व्यक्ति को अपने पेंशन और फंड के विषय में स्वयं ही फैसला लेना पड़ता है।p p f , बीमा ,retairmentयोजनाये आदि प्राइवेट व् सरकारी कंपनियों द्वारा चलाई जा रही हैं|

#11) कार्यभार (Workload or Work Pressure) –

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ऐसा सोचना गलत है कि सरकारी नौकरी में वर्क स्ट्रेस नहीं होता| यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह अपना कार्य कितनी ईमानदारी और निष्ठा से करता है। कार्य को टालना उस व्यक्ति की अपनी बेईमानी होती है। यदि स्टाफ की बात की जाए तो  सरकारी  नौकरी में सीनियर जूनियर व्यक्ति पर कार्यभार डालते रहते हैं।

प्राइवेट सेक्टर में  जूनियर और सीनियर सभी  मिलकर एक टीम की तरह कार्य करते हैं। प्राइवेट सेक्टर जॉब में व्यक्ति अपने कार्य को लेकर प्रतिबद्ध होता है।

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#12) छुट्टियां (Holiday) –

वैसे तो सरकारी नौकरियों में कई पब्लिक और नेशनल हॉलिडे होती हैं किंतु अब ऐसा नहीं है। सरकार ने कई छुट्टियों में कटौती की है।
प्राइवेट कंपनियां भी नेशनल और पब्लिक हॉलीडे प्रदान करती हैं। इसके अतिरिक्त उनके पास भी CL मौजूद होती हैं।

#13) रिक्तियां या वेकैंसी (Job Vacancy) –

रिक्तियों की बात की जाए तो सरकारी विभागों की अपेक्षा प्राइवेट कंपनियों में जॉब वैकेंसी अधिक होती हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कई पब्लिक सेक्टर बैंक समय-समय पर वैकेंसी की घोषणा करती रहती हैं और रिक्तियों को भरने के लिए परीक्षा का आयोजन करते हैं।एक ही पद क लिए लाखो आवेदन आते हैं जिससे प्रतियोगिता कठिन हो जाती है|

प्राइवेट कंपनियों में  जल्दी-जल्दी वैकेंसी निकलती रहती हैं  और  इनमें  सिलेक्ट होने के लिए  कोई लंबी प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना पड़ता और ना ही  सालों तक इंतजार करना पड़ता है। लगातार नई कंपनियों के खुलने से युवाओं को जॉब ऑपर्चुनिटी  मिलती है।

#14) ऑफिस एनवायरनमेंट (Office Environment) –

crane-grab-scrap news123 job envorinmentसरकारी विभागों की बिल्डिंग जर्जर और मरी हालत में होती हैं। वहां कार्य करने के लिए वह माहौल प्राप्त नहीं होता जो किसी व्यक्ति को  सही ढंग से कार्य करने में आवश्यक होता है। कई सालों तक  बिल्डिंग्स की मरम्मत और पुताई का कार्य भी नहीं होता है।वहां के फर्नीचर व् साफ सफाई पर कम ध्यान दिया जाता है|

उसके विपरीत प्राइवेट ऑफिस में आकर्षक बिल्डिंग व साफ सुथरा माहौल रहता है। शुद्ध व साफ-सुथरे माहौल में  कार्य करने से कार्य में तेजी व प्रगति आती है।

निष्कर्ष

देखा दोस्तों इतने सारी बाते है जो की ये दर्शाती है की प्राइवेट नौकरी भी अब सरकारी नौकरी के बराबर है | जीवन में हर इन्सान को काम करना बहुत जरूरी होता है | जिससे वो अपना और अपने घर का अच्छे से पालन पोषण  कर पाए | अगर आप लोग कुछ और जानना चाहते है या कुछ बताना चाहते है तो नीचे कमेंट करे | 

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Uma Singh
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