ज़रूरत है तनाव के सही प्रबंधन की, Management of Depression

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भय और दबाव (Fear And Pressure) जीवन के दो महत्वपूर्ण भाग हैं और इन्हीं के कारण व्यक्ति के तनाव या अवसाद में आने की आशंका बढ़ जाती है लेकिन अवसाद या तनाव में आने से पहले यदि साहस के साथ इनका सही प्रबंधन (Management of Depression ) सीख लिया जाए तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे। कभी कभी हम अपने जीवन में बेहतर परफॉर्मेंस देने की कोशिश में दबाव का शिकार हो जाते हैं लेकिन हमें बेहतर परफॉर्मेंस देने के दबाव को सकारात्मक तरीके से लेना चाहिए।

यदि आप डर या दबाव को सही तरीके से मैनेज करना जान जाए तो यह आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। किसी चीज से भयभीत होने पर व्यक्ति के मन में ‘ऐसा न करने पर कहीं ऐसा न हो जाए’ के भाव उत्पन्न होने लगते हैं। इसके बाद वह दोगुनी गति से कार्य करने लगता है और उस कार्य में सफलता प्राप्त करता है।

1# भय या दबाव का मैनेजमेंट

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एक सर्वे के अनुसार भारत में 40% लोग तनाव से जूझ रहे हैं। घर ऑफिस के दबाव के अलावा परीक्षा में पास न होने या बढ़िया नौकरी न मिल पाने की वजह से भी लोग भय तथा दबाव में जीने लगते हैं। जिसके फलस्वरुप ज्यादातर व्यक्ति कभी न कभी अवसादग्रस्त होते ही हैं। यदि हम भय या दबाव का मैनेजमेंट सकारात्मक तरीके से करना शुरू कर दें तो न सिर्फ अवसाद की समस्या चुटकियों में हल हो सकती है बल्कि सुखद परिणाम भी सामने आ सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में जीव विज्ञान प्रोफेसर डेनेलिया कोफर के अनुसार थोड़े समय का दबाव दिमाग को न सिर्फ सजग बनाता है बल्कि मजबूती भी प्रदान करता है। इससे याददाश्त भी बढ़ती है।

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2# नर्वसनेस अच्छी होनी चाहिए

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मनोवैज्ञानिक ईशा सिंह कहती हैं कि काम का दबाव हर परिस्थिति में आप को जवाब देह बनाता है। आप पहले के मुकाबले ताकतवर बन कर उभरते हैं ताकि समस्याओं का हल निकाल सके। यदि आप डर को मैनेज करना सीख ले तो स्टेज पर परफॉर्मेंस देने में आप नर्वस (Nervous) नहीं होंगे। यदि आप नर्वस फील करें भी तो यह नर्वसनेस अच्छी होनी चाहिए। इसमें व्यक्ति का ध्यान पूरी तरह स्वयं पर होता है जिससे वह एकाग्रचित होकर कार्य बढ़िया तरीके से कर पाता है।

3# ठीक है थोड़ी टेंशन

 

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Image Courtesy-google

विशेषज्ञों के अनुसार दो प्रकार के तनाव होते हैं सकारात्मक और नकारात्मक तनाव। हल्की मात्रा का दबाव भय या तनाव हो तो यह लगभग फायदेमंद ही होता है। जब तनाव अधिक या अनियंत्रित (uncontrolled Tension) हो जाता है तब यह नकारात्मक प्रभाव दिखाता है।

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Uma Singh
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