अपनी याददाश्त को ऐसे बनाएं बेहतर; How to Improve Memory

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हम अक्सर अपने जीवन में कई जरूरी काम करना भूल जाते हैं। बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त (Memory) कमजोर होना आम बात है। वास्तव में उम्र का याददाश्त पर इतना असर नहीं होता जितना हमारी जीवन शैली का होता है। यदि हमारी जीवन शैली व्यवस्थित नहीं है तो बुढ़ापा हो गया जवानी हमारी याददाश्त कमजोर हो जाती है और हमें छोटी-छोटी बातें भूल जाने की आदत हो जाती है।जरुरत है इस बात की कि How to Improve Memory.

याददाश्त को मजबूत बनाए रखने के लिए अपनी आदतों में बदलाव लाना जरूरी है। याददाश्त का सीधा संबंध हमारे खान-पान से जुड़ा होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ मस्तिष्क पर असर पड़ता है। इस संबंध में एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह जरूरी नहीं कि उम्र के साथ-साथ हम याद रखने की क्षमता खो दे बल्कि यह तो स्वयं पर निर्भर करता है। अतः व्यवस्थित जीवन शैली और खानपान हमारी याददाश्त को दुरुस्त रख सकता है। आइए जानते हैं किन तरीकों से हम अपनी याददाश्त को बेहतर (How to Improve Memory) बना सकते हैं-

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1# व्यायाम  (Exercise)

exercise improves brain power

एक्सरसाइज न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि यह हमारी याददाश्त को भी बेहतर बनाता है। एक्सरसाइज करने से हमारे मस्तिष्क की कार्य क्षमता बढ़ती है। यह हमारे शरीर में ब्लड सरकुलेशन और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन को पहुंचाने का कार्य करता है। एक्सरसाइज करने से मस्तिष्क के महत्वपूर्ण भाग हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) जो मेमोरी सेंटर कहलाता है, की कोशिकाओं में वृद्धि होती है नियमित रूप से एक्सरसाइज करना हमारी मेमोरी को मजबूत बनाता है। एक्सरसाइज के तौर पर आप स्विमिंग, साइकिलिंग, जोगिंग, एरोबिक्स आदि किसी भी प्रकार की गतिविधि अपना सकते हैं।

2# ध्यान और प्राणायाम (Meditation)

याददाश्त को मजबूत बनाने में मेडिटेशन भी काफी सहायक होता है। शोध अध्ययन से इस बात की पुष्टि होती है कि मेडिटेशन से एकाग्रता व सीखने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है। नियमित मेडिटेशन करने से मेमोरी लॉस जैसी समस्या भी नहीं होती। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियां जैसे डिमेंशिया,अल्जाइमर और पार्किसंस भी नहीं होती। मेडिटेशन तनाव को भी दूर रखता है।

3# तनावमुक्त  (Stress Free)

stay stressfree for brain power

किसी भी बात को लेकर तनाव या चिंता करना याददाश्त पर सीधा असर डालता है। जब भी हम तनाव में होते हैं तो हमारे शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन स्रावित होता है जो याददाश्त पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए प्रयास करें कि आप तनावमुक्त रहें और स्वयं को खुश रखें। खुश रहने के लिए आप अपने मनपसंद कार्य कर सकती हैं। जैसे-पेंटिंग करना, गाना गाना, चुटकुले पढ़ना,कॉमेडी फिल्म देखना।

4# मस्तिष्क खेल (Brain Games)

बेहतर याददाश्त के लिए आपको ब्रेन गेम्स अवश्य खेलना चाहिए। जैसे- सुडोकू, क्रॉसवर्ड पजल, शतरंज जैसे खेल मस्तिष्क की क्षमता विकसित करते हैं। यह हमारे मस्तिष्क की सक्रियता भी बढ़ाते है। मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाने के लिए आप नई चुनौतियों के साथ-साथ किसी नई चीज को सीखने का भी काम कर सकते हैं। जैसे किसी नई भाषा को सीखना या फिर किसी नए वाद्य यंत्र को बजाना सीखना।

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5# व्यवस्थित रहना (Proper Management)

यदि आप अपने दैनिक कार्यों में भी कई चीजों को भूल जाते हैं तो इसके लिए आपको अपने घर को उचित प्रकार से व्यवस्थित रखना जरूरी है। घर में प्रत्येक चीज व्यवस्थित रहने से आप को कोई भी वस्तु ढूंढने में दिक्कत नहीं आएगी और आपके सभी कार्य सामान्य रूप से होते रहेंगे। घर में इस्तेमाल की जाने वाली सभी वस्तुओं की अपनी एक व्यवस्थित जगह होनी चाहिए। जिससे आप को समय पड़ने पर उस वस्तु को ढूंढने में समय बर्बाद न करना पड़े। किसी भी दिन के जरूरी कामों को आप कैलेंडर में निशान लगाकर याद रख सकते हैं या फिर आप अपनी डायरी में भी नोट कर सकते हैं।

6# सही खानपान (Healthy Diet)

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एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन से भरपूर फल मशरूम, हरे पत्तेदार सब्जियां ब्रेन पावर बढ़ाती हैं। लगभग सभी हरी सब्जियों मे विटामिन ई, के, बी 9, फाइटर न्यूट्रिएंट्स जैसे विटामिन सी पाए जाते हैं जो कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास के लिहाज से बेहद जरूरी हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड भी याददाश्त को दुरुस्त रखने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त अखरोट में भी ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। बादाम और मूंगफली का सेवन भी यादाश्त को बेहतर बनाता है। बादाम में विटामिन, प्रोटीन, डीएट्री फाइबर और ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। वही मूंगफली में विटामिन और प्रोटीन इत्यादि पोषक तत्वों की अधिकता रहती है जिनकी वजह से मस्तिष्क की कोशिकाएं मजबूत होती हैं और वे बेहतर काम करती हैं। इसके अतिरिक्त साबुत अनाज भी मस्तिष्क को हानिकारक फ्री रेडिकल से सुरक्षा प्रदान करता है।

7# पर्याप्त नींद (Sufficient Sleep)

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रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने से हमारा मस्तिष्क ठीक ढंग से काम करता रहता है। आमतौर पर नींद पूरी न हो तो उसका असर न सिर्फ हमारी याददाश्त पर बल्कि रचनात्मकता और काम पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर भी पड़ता है। पर्याप्त नींद न सिर्फ याददाश्त को मजबूत करती है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है। पर्याप्त नींद लेने से हम ताजगी का अनुभव करते हैं और इससे कैंसर, दिल की बीमारियों और अवसाद का खतरा भी कम हो जाता है। अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है कि अच्छी याददाश्त सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है।

8# कार्यभार (Work load)

work load affects brain

Image Courtesy-google

 

एक समय में एक काम करना याददाश्त के लिहाज से काफी अच्छा होता है। कई सारे काम एक साथ करने से याददाश्त पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। दरअसल एक साथ कई कार्य करने से हम चीजों को भूल सकते हैं। इसलिए हमें एक समय में सिर्फ एक कार्य करना चाहिए। इससे न सिर्फ हमारा कार्य बेहतर होता है बल्कि हमारे मस्तिष्क पर भी बोझ नहीं पड़ता। इस प्रकार याददाश्त के लिए जिम्मेदार हमारे मस्तिष्क का मेमोरी सेंटर हिप्पोकैम्पस ताउम्र बेहतर कार्य करता रहेगा।

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Uma Singh
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