आप अपने डर पर इस तरह पा सकते हैं विजय : आत्मविश्वास बढ़ाये

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डर क्या है? इसकी व्याख्या हम अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग-अलग रूप से कर सकते हैं। डर या भय हमारी मानसिकता पर निर्भर करता है कि हमारी सोच नकारात्मक है या सकारात्मक। नकारात्मक सोच हमें भय की ओर अग्रसर करती है। जैसे कि काम समय पर हो पाएगा या नहीं, आप परीक्षा में पास हो पाएंगे या नहीं, किसी खेल को खेलते समय आप उसमें जीत पाएंगे या नहीं।

व्यक्ति या तो उस व्यक्ति या वस्तु से डरता है जिसे वह पसंद नहीं करता या जिसके बारे में उसको अधिक ज्ञान नहीं होता। आपने कई विद्यार्थियों को देखा होगा कि प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन के समय उनके शरीर में अजीब सा कंपन होने लगता है, उनकी हथेली में पसीना आने लगता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और कभी-कभी अत्यधिक अभ्यास करने के बावजूद भी उन्हें उस वक्त कुछ भी याद नहीं रहता। उस समय भय इतने सारे लोगों के सामने खड़े होकर बोलने का है।

 

सामान्य रुप से प्रकृति का यह नियम है कि आप की जैसी सोच होती है नकारात्मक या सकारात्मक। आप अपने जीवन में उन्हीं अनुभव को प्राप्त करते हैं। जैसे- जब आप नकारात्मक सोच की तरफ बढ़ने लगते हो तो आपके जीवन में इसी सोच के कारण वही घटनाएं घटित होने लगती हैं जिसका आपको भय था। भय एक ऐसी भावना होती है जो न चाहते हुए भी व्यक्ति की मानसिकता में आ जाती है। यह भय आपको आपके आने वाली जिंदगी में अच्छा प्रदर्शन करने में रुकावट डालता है।

इस भय को कम करने के लिए सबसे पहला रास्ता यह है कि आप को अपनी ताकत पर फोकस करना है और दूसरा यह है कि आपको अपने जीवन का एक उद्देश्य निर्धारित करना है। इन दोनों बातों के बाद आपको अपने मन में सिर्फ यही बातों का विचार करना है कि जो आप अपने जीवन में आगे पाना चाहते हैं और जब अब आप अपने मन में अपने उद्देश्य और विचारों को इतना ज्यादा बढ़ा लेंगे तब भय आपके जीवन में अपनी प्रतिबद्धता को कम कर देगा।

जब व्यक्ति अपने विचारों में अपने लक्ष्य और अपनी ताकत पर ध्यान देते हुए अपने मन में सिर्फ उन्हीं बातों का विचार करता है तो उस व्यक्ति में भय नामक चीज विकसित नहीं हो पाती जैसे कि यदि कोई विद्यार्थी जिसे साइकिल चलाना आता है।वह गांव हो या शहर कहीं भी साइकिल चला लेगा किंतु वहीं पर एक वयस्क व्यक्ति जिसे साइकिल चलाना नहीं आता है उसे साइकिल चलाने में भय प्रतीत होगा। फर्क सिर्फ इतना है कि बच्चे में अपनी ताकत और अपना उद्देश्य विकसित हो गया था और व्यस्क में नही क्योंकि उस व्यक्ति को साइकिल चलाने के नियम और सिद्धांतों के बारे में पता ही नहीं था। इसलिए अपने भय को कम करने के लिए व्यक्ति को अपनी ताकत पर फोकस करना चाहिए। इसी प्रकार सभी विद्यार्थियों को अपने अंदर अपनी कमजोरियों पर फोकस करके अपनी ताकत विकसित करनी चाहिए  और अपने उद्देश्य पर  निरंतर अग्रसर रहना चाहिए।

विद्यार्थी अपने भय को खत्म करने के लिए सबसे पहला कार्य अपनी क्षमता या ताकत को पहचान कर अपने उद्देश्य की प्राप्ति कर सकते हैं और भय से मुक्ति पा सकते हैं।अब बात करते हैं दूसरे कारण उद्देश्य पर। यदि व्यक्ति अपने उद्देश्य को लेकर निश्चित है तो उसके अंदर भय विकसित नहीं होगा। वह विद्यार्थी जो अपने उद्देश्य पर केंद्रित नहीं रहते उन्हें अपनी परीक्षाओं में भय का सामना करना पड़ता है और यह उद्देश्य तभी सक्रिय होगा जब आप अपने क्षमता को विकसित करेंगे। जब आपका उद्देश्य आपके जीवन में सबसे ऊंचे स्थान पर रहेगा तो आप भय को महसूस नहीं कर पाएंगे और आप के मन में सकारात्मक विचार के साथ साथ अपने उद्देश्य की प्राप्ति होगी।

इस ब्लॉग के माध्यम से सभी विद्यार्थियों को यह सीखना चाहिए कि उनको अपनी आने वाली परीक्षाओं में डर से मुक्ति पाने के लिए अपनी ताकत और अपने उद्देश्य पर केंद्रित करके उन पर प्रयास करना चाहिए ताकि भविष्य में अपने उद्देश्य की प्राप्ति आसानी से कर सके और भय से होने वाले नुकसानों से बच सके।

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Hum Hain Na” is a multi-operational group founded by the joint venture of Er. Mohit Johari, former assistant professor and counsellor in a well known engineering college and Er. Ranitesh Gupta, former assistant professor and counsellor. “Hum Hain Na” is a light house for those who misleads from their direction and need the right path.

To achieve this, “Hum Hain Na” conducts motivational workshops focusing on the issues like…

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Uma Singh
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